दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के बागबानों पर इस बार कुदरत ने सबसे क्रूर प्रहार किया है। घाटी के कई हिस्सों में अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सेब के बगीचों को तहस-नहस कर दिया है। सालभर की कड़ी मेहनत के बाद जब पेड़ फलों से लदने शुरू हुए थे, तभी आसमान से बरसी सफेद आफत ने बागबानों के सुनहरे सपनों को पल भर में मलबे में तब्दील कर दिया। प्रभावित इलाकों से आ रही तस्वीरें बयां कर रही हैं कि इस तबाही ने न सिर्फ मौजूदा फसल को बर्बाद किया है, बल्कि आने वाले कई सालों के लिए पेड़ों की सेहत को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है।
बागबानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट
कश्मीर की एक बहुत बड़ी आबादी सीधे तौर पर सेब के कारोबार से जुड़ी हुई है, जिसके लिए यह सीजन सालभर की आजीविका का मुख्य साधन होता है। ओलावृष्टि की वजह से सेब के पेड़ों के पत्ते और फल जमीन पर बिछ गए हैं, जिससे किसानों को भारी वित्तीय आघात लगा है। कई बागबानों ने बैंकों से कर्ज लेकर कीटनाशक, खाद और पैकेजिंग सामग्री का इंतजाम किया था, लेकिन अब फसल के पूरी तरह नष्ट हो जाने से वे कर्ज के जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस आपदा ने किसानों के परिवारों के सामने भरण-पोषण और भविष्य की अनिश्चितता का एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन से मुआवजे की गुहार
इस अप्रत्याशित तबाही के बाद घाटी के विभिन्न किसान संगठनों और एसोसिएशनों ने एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सेब उत्पादकों का कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते उनकी सुध नहीं ली, तो कश्मीर का बागबानी क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो जाएगा। किसानों की मुख्य मांगों में प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत जमीनी सर्वेक्षण (गिरदावरी) करवाना, प्रति एकड़ के हिसाब से उचित वित्तीय राहत राशि की घोषणा करना और कृषि ऋणों की किस्तों को फिलहाल स्थगित करना शामिल है। बागबानों का मानना है कि पारंपरिक राहत पैकेजों के बजाय इस बार एक विशेष और बड़े आर्थिक पैकेज की जरूरत है।
फलों की गुणवत्ता और बाजार पर पड़ेगा असर
इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर आने वाले दिनों में देश भर की फल मंडियों में देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, जो फसल थोड़ी-बहुत बची भी है, उस पर ओलों की चोट के कारण दाग पड़ गए हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य बेहद कम हो जाएगा। कश्मीर का सेब अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और स्वाद के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन इस बार आपूर्ति में भारी गिरावट आने की आशंका है। यह संकट न केवल स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी भारी पड़ेगा।