दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब की राजनीति से जुड़े चर्चित मामले में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता Bikram Singh Majithia को अमृतसर अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई है। उन पर आरोप था कि वे अपने समर्थकों के साथ थाना परिसर पहुंचे और वहां हिरासत में लिए गए एक समर्थक को छुड़ाने की कोशिश की।
पुलिस के आरोप क्या हैं?
पुलिस का दावा है कि घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाना परिसर में पहुंचे थे। आरोप लगाया गया कि इस दौरान सरकारी कामकाज में बाधा डाली गई, दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाया गया और कुछ लोगों ने कथित तौर पर आक्रामक व्यवहार भी किया। जांच एजेंसियों ने यह भी कहा कि मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया था।
समर्थक को छुड़ाने को लेकर विवाद कैसे बढ़ा?
मामले की शुरुआत एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी से जुड़ी बताई गई, जिसे अकाली दल से जुड़ा समर्थक बताया गया। पुलिस के अनुसार, इसी को लेकर मजीठिया और उनके समर्थक थाने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां से हिरासत प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हुई, जबकि मजीठिया पक्ष इसे अलग तरीके से देख रहा है।
अदालत में क्या दलील दी गई?
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि नेता और उनके साथ मौजूद लोग केवल जानकारी लेने पहुंचे थे और उन पर लगाए गए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। वहीं अदालत ने पहले की सुनवाई में जांच से जुड़े कुछ पहलुओं पर सवाल भी उठाए थे। इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देते हुए जमानत मंजूर की।
आगे क्या होगा?
अंतरिम जमानत मिलने से मजीठिया को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन केस की सुनवाई और जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।