दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
एक MBA छात्रा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी बालिग महिला या पुरुष को उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को संविधान से जुड़ा अधिकार बताया।
परिवार के दबाव से परेशान होकर पहुंची अदालत
याचिकाकर्ता छात्रा ने कोर्ट को बताया कि उस पर पारिवारिक स्तर पर विवाह को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उसने अपनी सुरक्षा और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की।
जीवनसाथी चुनना व्यक्ति का निजी फैसला
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह केवल सामाजिक व्यवस्था नहीं बल्कि व्यक्ति के जीवन से जुड़ा अहम निर्णय है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय बालिग व्यक्ति की इच्छा के अनुसार होना चाहिए।
प्रशासन को सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवती को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और उसके फैसले में किसी तरह की जबरदस्ती या बाधा न आने दी जाए।
न्यायालय ने दोहराया स्वतंत्रता का सिद्धांत
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कानून हर बालिग नागरिक को सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है, जिसमें अपनी पसंद से विवाह करने का निर्णय भी शामिल है।