दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के कायाकल्प का काम अब ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां निर्माण गतिविधियों का सीधा असर रेल परिचालन पर पड़ने वाला है। स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए रेलवे ने सितंबर से अक्टूबर के बीच अलग-अलग चरणों में बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग कार्य कराने का निर्णय लिया है। इसके चलते यात्रियों को करीब 36 दिनों तक ट्रेनों की आवाजाही में बदलाव का सामना करना पड़ेगा।
रेलवे की ओर से 10 सितंबर से 15 अक्टूबर तक अलग-अलग चरणों में पावर और ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाएगा। इस अवधि में स्टेशन की विभिन्न रेल लाइनों पर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे। इसका असर सिर्फ प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई ट्रेनों के संचालन कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 12 ट्रेनें पूरी तरह रद्द रहेंगी, जबकि कई ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग से हटाकर दूसरे रास्ते से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को बीच के किसी स्टेशन तक ही चलाकर वहीं समाप्त किया जाएगा।
तीन चरणों में होगा काम
रेलवे ने पूरे कार्य को एक साथ करने के बजाय तीन हिस्सों में बांटा है। पहला चरण 10 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगा। इसके बाद 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक दूसरा चरण होगा और अंतिम चरण 4 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक जारी रहेगा। प्रत्येक चरण में 12 दिन का ब्लॉक निर्धारित किया गया है।
इस दौरान स्टेशन की अलग-अलग रेल लाइनों पर काम आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे की योजना निर्माण गतिविधियों को इस तरह पूरा करने की है कि मौजूदा रेल परिचालन को जहां तक संभव हो नियंत्रित तरीके से जारी रखा जा सके। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर एक साथ कई लाइनों पर काम होने के कारण कुछ ट्रेनों की समय-सारणी और संचालन व्यवस्था प्रभावित होना तय है।
गर्डर लगाने और पुराने ढांचे को हटाने का काम
इस चरण में रेलवे स्टेशन के ढांचागत विकास से जुड़े अहम कार्य किए जाएंगे। लाइन नंबर 1 से लेकर 8 तक अलग-अलग हिस्सों में ट्रैफिक एवं ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरणों से जुड़े ब्लॉक लिए जाएंगे। निर्माण एजेंसी की ओर से बैलेंस गर्डर की स्थापना और उसे निर्धारित स्थान पर पहुंचाने का काम किया जाना है।
इसके साथ ही मौजूदा फुट ओवरब्रिज के कुछ गर्डरों को हटाने का काम भी किया जाएगा। यह कार्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्टेशन के पुनर्विकास के तहत यात्रियों की आवाजाही और प्लेटफॉर्म कनेक्टिविटी को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। निर्माण गतिविधियों के दौरान सुरक्षा को देखते हुए रेलवे को रेल लाइनों पर परिचालन नियंत्रित करना पड़ेगा।
12 ट्रेनें पूरी तरह प्रभावित
निर्माण कार्य का सबसे बड़ा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा, जिन्होंने इस अवधि में चंडीगढ़ से यात्रा की योजना बनाई है। रेलवे के कार्यक्रम के अनुसार 12 ट्रेनों को रद्द किया गया है। इसके अलावा कई ट्रेनों के फेरों पर असर पड़ेगा और कुल 442 फेरे प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
इसका अर्थ यह है कि यात्रियों को केवल अपनी ट्रेन के रद्द होने की स्थिति ही नहीं देखनी होगी, बल्कि यात्रा की तारीख से पहले यह भी जांचना होगा कि उनकी ट्रेन निर्धारित मार्ग से चल रही है या नहीं। जिन ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है, उनमें कुछ को शॉर्ट टर्मिनेट या शॉर्ट ओरिजिनेट किया जा सकता है। यानी ट्रेन अपने सामान्य गंतव्य तक पहुंचने के बजाय बीच के किसी स्टेशन से वापस लौट सकती है या वहीं से यात्रा शुरू कर सकती है।
कई ट्रेनों का रास्ता बदलेगा
कुछ ट्रेनों को उनके सामान्य रूट पर न चलाकर वैकल्पिक मार्ग से संचालित किया जाएगा। इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ सकता है जो चंडीगढ़ या आसपास के स्टेशनों से नियमित रूप से यात्रा करते हैं।
रूट बदलने की स्थिति में किसी ट्रेन का चंडीगढ़ स्टेशन पर ठहराव भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए यात्रियों को केवल टिकट पर छपी जानकारी के आधार पर यात्रा की योजना बनाने के बजाय यात्रा से पहले रेलवे की ताजा सूचना की जांच करने की सलाह दी गई है।
रेलवे स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले, उद्घोषणा और संबंधित परिचालन सूचना पर नजर रखना यात्रियों के लिए जरूरी होगा, क्योंकि निर्माण अवधि के दौरान प्लेटफॉर्म संबंधी बदलाव भी किए जाएंगे।
प्लेटफॉर्म भी बदल सकते हैं
निर्माण कार्य के कारण कई ट्रेनों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म से संचालित किया जाएगा। पहले से निर्धारित प्लेटफॉर्म बदलने की स्थिति में यात्रियों को स्टेशन पर पहुंचने के बाद अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।
विशेष रूप से बुजुर्ग यात्रियों, बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को पहले से समय लेकर स्टेशन पहुंचना बेहतर रहेगा। रेलवे ने भी यात्रियों को स्टेशन पर होने वाली उद्घोषणाओं और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर ट्रेन संबंधी जानकारी देखने की सलाह दी है।
एक ट्रेन को रास्ते में भी नियंत्रित किया जाएगा
निर्माण कार्य का प्रभाव केवल स्टेशन के भीतर सीमित नहीं रहेगा। डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस के संचालन को भी कुछ निर्धारित तारीखों पर नियंत्रित किया जाना है। यह ट्रेन सहारनपुर और चंडीगढ़ के बीच करीब एक घंटे तक नियंत्रित की जाएगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10, 17, 24 और 31 अगस्त तथा 4 सितंबर को इस ट्रेन के संचालन को इंजीनियरिंग कार्य के कारण नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई थी। ऐसे बदलावों का उद्देश्य निर्माण कार्य के दौरान रेल यातायात और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।
करोड़ों की परियोजना, कई साल से चल रहा काम
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास करीब 462 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह स्टेशन केवल चंडीगढ़ के यात्रियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल करते हैं।
पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। दोनों तरफ स्टेशन भवन, एयर कॉनकोर्स और नए फुट ओवरब्रिज जैसी संरचनाओं पर काम किया जा चुका है। हालांकि, प्लेटफॉर्म शेल्टर, ड्रेनेज, फिनिशिंग और कुछ यात्री सुविधाओं से जुड़े कार्य अभी बाकी बताए गए हैं। परियोजना को पूरा करने की समय-सीमा पहले भी कई बार आगे बढ़ चुकी है।
निर्माण के बीच यात्रियों को पहले भी हुई दिक्कत
स्टेशन का पुनर्विकास लंबे समय से चल रहा है और निर्माण के साथ-साथ यहां नियमित रेल सेवाओं को भी जारी रखा गया है। इस वजह से अलग-अलग समय पर यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा है।
स्टेशन पर बारिश के दौरान पानी के रिसाव, जलभराव, एस्केलेटर से जुड़ी समस्याओं और स्टेशन के बाहर यातायात दबाव जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं। स्टेशन के आसपास वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए रेलवे और चंडीगढ़ पुलिस की ओर से यातायात व्यवस्था का संयुक्त सर्वे भी किया गया था।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी
सितंबर से अक्टूबर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि टिकट बुक कराने के बाद यात्रा को अंतिम न मानें। यात्रा की तारीख नजदीक आने पर ट्रेन का नंबर, समय, रूट और प्लेटफॉर्म दोबारा जांचना जरूरी होगा।
विशेष रूप से जिन यात्रियों की यात्रा चंडीगढ़ से शुरू होनी है या जिन्हें चंडीगढ़ पहुंचकर दूसरी ट्रेन पकड़नी है, उन्हें अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। प्लेटफॉर्म में बदलाव या ट्रेन के संचालन में परिवर्तन होने की स्थिति में जल्दबाजी परेशानी बढ़ा सकती है।
रेलवे की ओर से यात्रियों से निर्माण अवधि में सहयोग करने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कार्य के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था और नियमित उद्घोषणा की जाएगी, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।
काम पूरा होने के बाद मिलेगी राहत की उम्मीद
फिलहाल यात्रियों के लिए यह 36 दिन असुविधा वाले हो सकते हैं, लेकिन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्देश्य भविष्य में यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन की यात्री क्षमता, आवाजाही व्यवस्था और सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
फिलहाल चुनौती यह है कि निर्माण कार्य और रोजाना चलने वाली सैकड़ों रेल यात्राओं के बीच तालमेल बनाए रखा जाए। 10 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच होने वाले चरणबद्ध काम में रेलवे के लिए सुरक्षा के साथ परिचालन को संभालना अहम रहेगा।
इसलिए इस अवधि में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वालों के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही होगा कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की पुष्टि करें और स्टेशन पर निर्धारित समय से कुछ पहले पहुंचें। निर्माण कार्य के चलते बदली व्यवस्था में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी यात्रियों को आखिरी समय की परेशानी से बचा सकती है।