दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तीसरे चरण में देशभर की मतदाता सूचियों में बड़ा बदलाव सामने आया है। अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जारी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13.37 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। यह संख्या एसआईआर से पहले दर्ज मतदाताओं की करीब 14.1 प्रतिशत है। हालांकि, इसे अंतिम रूप से वोट काटे जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद प्रभावित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
दिल्ली में करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर
राजधानी दिल्ली में एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज हुई है। पुनरीक्षण से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर करीब 97.53 लाख रह गई। यानी करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आए। यह कुल मतदाताओं का लगभग 32.8 प्रतिशत है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रतिशत के लिहाज से दिल्ली में सबसे बड़ी कमी दर्ज हुई है।
महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा नाम बाहर
महाराष्ट्र में भी मतदाता सूची में बड़ी गिरावट सामने आई है। एसआईआर से पहले राज्य में करीब 9.78 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या करीब 7.71 करोड़ रह गई। इस तरह 2.06 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं पहुंचे। यह राज्य के पहले से दर्ज मतदाताओं का करीब 21.1 प्रतिशत है। संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र में बड़ी कमी दर्ज हुई है।
13 करोड़ से ज्यादा नाम क्यों नहीं पहुंचे?
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची का सत्यापन और उसे अपडेट करना है। इस दौरान मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों, डुप्लीकेट नामों और ऐसे मतदाताओं की जानकारी की जांच की जा रही है, जिनका विवरण पुराने रिकॉर्ड से नहीं मिल पाया। अलग-अलग राज्यों में नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने के कारणों का अनुपात अलग है। महाराष्ट्र में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित/अनुपस्थित और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की अलग-अलग श्रेणियां बताई गई हैं।
ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होना अंतिम कटौती नहीं
एसआईआर को लेकर महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति का मतदान का अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो गया है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में दावा और आपत्ति दाखिल करने का प्रावधान है। संबंधित मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा शामिल कराने का दावा कर सकता है। दिल्ली में दावे-आपत्तियां 30 सितंबर तक दाखिल की जा सकती हैं और इसके बाद जांच की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम सूची प्रकाशित की जानी है।
अक्टूबर-नवंबर में सामने आएगी अंतिम तस्वीर
मतदाताओं की ओर से दाखिल दावों और आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। दिल्ली के कार्यक्रम के अनुसार 29 अक्टूबर तक दावों की जांच पूरी करने और 4 नवंबर को अंतिम संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम है। इसलिए अभी सामने आया 13.37 करोड़ का आंकड़ा ड्राफ्ट स्तर का है, अंतिम सूची में इसमें बदलाव संभव है।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल, ‘वोट चोरी’ बताया
एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 23 सितंबर को चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कथित तौर पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उनके अनुसार ‘वोट चोरी’ भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘देश के खिलाफ’ बताया और कहा कि न्याय होगा।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, नए मतदाताओं को जोड़ने, अपील और मतदाता डेटा प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर दिया जवाब
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए गए सवालों के बीच चुनाव आयोग ने कथित आंतरिक मतभेद की रिपोर्ट को अलग तरीके से प्रस्तुत किया। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल, स्पष्टीकरण या सुझाव दे सकते हैं, लेकिन एसआईआर सहित आयोग के सभी फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
चुनाव से पहले मतदाता सूची पर बढ़ी बहस
एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने के बाद मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल प्रक्रिया और नामों के सत्यापन को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना तथा मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना है। अंतिम स्थिति दावे-आपत्तियों की जांच और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, पीटीआई, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे और चुनाव आयोग से संबंधित उपलब्ध आधिकारिक जानकारी।