दोआबा न्यूजलाइन। सतपाल शर्मा
दुनिया के देशों के पासपोर्ट की ताकत को मापने वाला Henley Passport Index 2026 जारी हो चुका है। इस बार की रैंकिंग ने साफ कर दिया है कि वैश्विक यात्रा की आज़ादी सभी देशों के लिए बराबर नहीं है। कुछ देशों के नागरिक जहां दुनिया के अधिकांश हिस्सों में बिना वीजा जा सकते हैं, वहीं कई देशों के लोगों के लिए विदेश यात्रा अब भी मुश्किल बनी हुई है।
इस सूची में भारत 80वें स्थान पर है। भारतीय पासपोर्ट धारक करीब 55 से 58 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। यह स्थिति दिखाती है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय यात्रा पहुंच अभी भी सीमित दायरे में है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है।
वहीं, इस साल भी सिंगापुर ने पहला स्थान हासिल किया है। सिंगापुर के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं, जहां के पासपोर्ट धारकों को 187 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलती है।
यूरोप के देश भी इस रेस में मजबूत स्थिति में हैं। नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के नागरिक 185 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। औसतन यूरोपीय देशों की पहुंच भी काफी मजबूत बनी हुई है, जो वैश्विक स्तर पर उनके कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती है।
रैंकिंग के निचले हिस्से में स्थिति काफी अलग है। सोमालिया, नाइजीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर पाते हैं। यह अंतर बताता है कि राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक स्थिति और वैश्विक संबंध किसी देश के पासपोर्ट की ताकत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
खास बात यह भी है कि पाकिस्तान का पासपोर्ट भी कमजोर श्रेणी में बना हुआ है, जो 98वें स्थान पर है और उसके नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा के विकल्प काफी सीमित हैं।
इस साल की रिपोर्ट एक बार फिर यह साबित करती है कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह किसी देश की वैश्विक साख, कूटनीति और ताकत का भी प्रतिबिंब होता है।