दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
भारत में आमतौर पर हर आय वर्ग के नागरिक को अपनी कमाई के अनुसार इनकम टैक्स देना होता है, लेकिन देश में एक ऐसा राज्य भी है जहां के कुछ लोग इस नियम से पूरी तरह मुक्त हैं। यह राज्य है सिक्किम, जहां विशेष संवैधानिक प्रावधानों के चलते स्थानीय निवासियों को इनकम टैक्स से छूट मिली हुई है।
ऐतिहासिक वजह से मिली खास छूट
सिक्किम पहले एक स्वतंत्र रियासत था और लगभग 330 वर्षों तक अपनी अलग पहचान बनाए रखा। साल 1975 में सिक्किम का भारत में विलय के बाद यह भारत का 22वां राज्य बना। विलय के समय यह शर्त रखी गई कि राज्य की पारंपरिक व्यवस्थाओं में बिना जरूरत बदलाव नहीं किया जाएगा।
इसी के तहत भारतीय संविधान में अनुच्छेद 371F जोड़ा गया, जिसने सिक्किम के मूल निवासियों के अधिकारों और विशेष प्रावधानों को संरक्षित किया।
कानूनी आधार: आयकर से पूरी छूट
भारतीय आयकर अधिनियम की धारा Section 10(26AAA) के तहत सिक्किम के “मूल निवासी” (Sikkimese) को उनकी आय पर इनकम टैक्स नहीं देना होता। इसमें सैलरी, व्यापार से आय, ब्याज, यहां तक कि सिक्योरिटीज और डिविडेंड से होने वाली कमाई भी शामिल है।
किन लोगों को मिलता है लाभ
यह छूट हर किसी को नहीं दी गई है। इसके लिए कुछ शर्तें तय हैं:
- सिक्किम का “मूल निवासी” होना जरूरी है
- या 26 अप्रैल 1975 से पहले से वहां स्थायी रूप से रह रहे हों
- ऐसी आय जो सिक्किम के भीतर अर्जित की गई हो
किन पर लागू नहीं होती छूट
कुछ परिस्थितियों में यह छूट लागू नहीं होती:
- दूसरे राज्यों से जाकर सिक्किम में बसने वाले लोगों को यह लाभ नहीं मिलता
- यदि सिक्किम का निवासी राज्य से बाहर कमाई करता है, तो उस आय पर टैक्स देना पड़ता है
क्यों है यह व्यवस्था खास?
भारत में यह एक अनोखा उदाहरण है जहां ऐतिहासिक और संवैधानिक समझौते के चलते आज भी टैक्स व्यवस्था अलग बनी हुई है। यह व्यवस्था सिक्किम की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई थी, जो आज भी जारी है।