दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब यूनिवर्सिटी में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की एमए लोक प्रशासन की परीक्षा से जुड़ी एक तस्वीर सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तस्वीर परीक्षा कक्ष के अंदर की बताई जा रही है, जिसके बाद विश्वविद्यालय में लागू सुरक्षा और अनुशासन संबंधी नियमों पर सवाल उठाए गए हैं।
परीक्षा हॉल में फोटो कैसे खींची गई?
चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट व सिंडिकेट के पूर्व सदस्य देवेश मौदगिल ने इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर सीपी राधाकृष्णन, कुलपति मीनाक्षी गोयल, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजा है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रतिबंध का मुद्दा
मौदगिल ने अपने पत्र में पूछा है कि परीक्षा के दौरान चन्नी की तस्वीर किस व्यक्ति ने और किस डिवाइस से खींची। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित होते हैं। ऐसे में तस्वीर लेने वाला उपकरण परीक्षा कक्ष तक कैसे पहुंचा, यह जांच का विषय है।
विशेष परीक्षा अवसर को लेकर भी सवाल
मामले में यह भी जानकारी मांगी गई है कि यदि चन्नी को सामान्य परीक्षा प्रक्रिया से अलग कोई विशेष अवसर दिया गया था, तो वह किस नियम या श्रेणी के तहत दिया गया। पत्र में संबंधित आवेदन, विशेष अवसर का कारण और सक्षम अधिकारी की अनुमति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
नियमों के समान पालन की मांग
मौदगिल ने कहा है कि विश्वविद्यालय में परीक्षा संबंधी नियम सभी परीक्षार्थियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की तत्काल जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि परीक्षा के दौरान किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी की गई है।
फिलहाल विवाद का केंद्र तस्वीर के सामने आने से ज्यादा यह सवाल है कि परीक्षा कक्ष में फोटो लेने की अनुमति या व्यवस्था कैसे बनी और क्या उस दौरान विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों का पालन हुआ।