दोआबा न्यूजलाइन। सतपाल शर्मा
देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए Supreme Court of India ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि लोगों की सुरक्षा सबसे पहले है। अदालत ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें सार्वजनिक स्थानों से हटाए गए आवारा कुत्तों को दोबारा उसी इलाके में छोड़ने की मांग की गई थी।
सार्वजनिक जगहों पर खतरा बने आवारा कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। अदालत ने माना कि देश में लगातार सामने आ रहे डॉग अटैक के मामलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है और राज्यों की तरफ से पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
“डर के माहौल में नहीं जी सकते लोग”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “सम्मान के साथ जीने का अधिकार” केवल इंसानों के लिए नहीं बल्कि बिना डर के सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार भी शामिल करता है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और आम लोग रोजाना डर के माहौल में नहीं रह सकते।
नगर निकायों को दिए सख्त निर्देश
अदालत ने राज्यों और नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए, उनका वैक्सीनेशन और नसबंदी कराई जाए और संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
डॉग लवर्स की दलील कोर्ट ने नहीं मानी
डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों ने कोर्ट से पुराने आदेश में बदलाव की मांग की थी। उनका कहना था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कई शहरों में अब शुरू हुई तैयारी
इधर कई शहरों में अब प्रशासन ने शेल्टर होम बनाने और आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से हटाने की तैयारी भी तेज कर दी है। स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष अभियान चलाकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।