दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
Sikkim में रहने वाले सिख समुदाय के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लागू होने जा रहा है। वर्षों से लंबित मांग और कानूनी लड़ाई के बाद अब राज्य सरकार ने आनंद मैरिज एक्ट के तहत विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। 1 जून 2026 से सिख दंपति अपने पारंपरिक ‘आनंद कारज’ विवाह को आधिकारिक रूप से रजिस्टर करवा सकेंगे।
इस फैसले के साथ अब देश के लगभग सभी हिस्सों में सिख समुदाय को अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार हुए विवाह को अलग पहचान देने का अधिकार मिल गया है। अब तक सिक्किम में इस कानून को लागू न किए जाने के कारण सिख परिवारों को अपने विवाह अन्य वैवाहिक कानूनों के तहत दर्ज करवाने पड़ते थे, जिससे समुदाय में लंबे समय से असंतोष था।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार हरकत में आई
मामला तब चर्चा में आया जब सिक्किम निवासी Amanjot Singh Chaddha ने इस मुद्दे को लेकर सीधे Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने जनहित याचिका दाखिल कर अदालत से मांग की थी कि जिन राज्यों ने अब तक आनंद मैरिज एक्ट के तहत नियम नहीं बनाए हैं, उन्हें बाध्य किया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकारों की धीमी कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद सिक्किम सरकार ने तेजी दिखाते हुए “सिक्किम आनंद मैरिज रजिस्ट्रेशन रूल्स 2026” तैयार किए और केंद्र को इसकी जानकारी भेजी। बाद में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर इसे लागू करने की तारीख तय कर दी।
आखिर क्यों जरूरी था यह बदलाव?
सिख समुदाय लंबे समय से यह मांग करता आ रहा था कि उनके पारंपरिक विवाह ‘आनंद कारज’ को अलग धार्मिक पहचान के साथ कानूनी मान्यता मिले। हालांकि Anand Marriage Act 1909 के जरिए यह अधिकार बहुत पहले मिल चुका था, लेकिन वर्षों तक विवाह रजिस्ट्रेशन की स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं होने से इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
साल 2012 में केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर राज्यों को अपने स्तर पर नियम बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई राज्यों में यह प्रक्रिया अधूरी रही। सिक्किम भी उन्हीं राज्यों में शामिल था जहां स्थानीय नियम लागू नहीं हुए थे।
सिख परिवारों को करना पड़ता था समझौता
नियमों की अनुपस्थिति में सिक्किम के सिख दंपतियों को अपने विवाह या तो Hindu Marriage Act 1955 के तहत या फिर पुराने स्थानीय विवाह नियमों के अंतर्गत दर्ज करवाने पड़ते थे। समुदाय का कहना था कि इससे उनकी धार्मिक परंपरा की अलग पहचान कमजोर होती है।
सिख संगठनों ने कई बार प्रशासनिक स्तर पर यह मुद्दा उठाया, लेकिन समाधान न निकलने पर मामला अदालत तक पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और कानूनी दबाव के बाद स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।
क्या होगा नया बदलाव?
1 जून से लागू होने वाले नए नियमों के तहत सिक्किम में होने वाले या पहले से हो चुके ‘आनंद कारज’ विवाहों का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को प्रक्रिया संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल विवाह पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक स्तर पर मजबूत करने वाला कदम भी है।
सिख समुदाय के लोगों ने इस फैसले को “देर से मिला न्याय” बताते हुए स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ किसी तरह का कानूनी समझौता नहीं करना पड़ेगा।