प्रस्तावना: पूरे राज्य में प्रशासनिक चक्का जाम की स्थिति
दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब भर में 7 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों (मुलाजिमों) और पेंशनभोगियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एकदिवसीय राज्यव्यापी महाहड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। ‘सांझा मुलाजिम मंच पंजाब’ के बैनर तले आयोजित इस विशाल आंदोलन के कारण समूचे राज्य में प्रशासनिक, स्वास्थ्य और जनसेवा से जुड़े विभागों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश (मास कैजुअल लीव) लेकर सरकारी कार्यालयों और डिस्पेंसरियों पर ताले लटका दिए हैं और सड़कों पर उतरकर जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस महाहड़ताल का असर राज्य के सभी 23 जिलों में साफ देखा जा रहा है। सचिवालय से लेकर तहसील और पटवारखानों तक पब्लिक डीलिंग पूरी तरह बंद है।
महाहड़ताल का मुख्य कारण: कर्मचारियों की 8 प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत की अपील कर रहे थे। समाधान न निकलने पर मंच ने निम्नलिखित 8 सूत्रीय मांगों को लेकर महाहड़ताल का फैसला लिया:
- 18% लंबित महंगाई भत्ता (DA) और एरियर का भुगतान:
कर्मचारियों व पेंशनभोगियों की 18 फीसदी लंबित डीए की किस्तों को अविलंब जारी किया जाए और पिछले बकाए (एरियर) का तुरंत एकमुश्त भुगतान किया जाए। - पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली:
नई पेंशन स्कीम (NPS) को पूरी तरह समाप्त कर पंजाब में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को जमीनी स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। - कच्चे, आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण:
विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और कॉरपोरेशनों में वर्षों से तैनात कॉन्ट्रैक्ट, आउटसोर्स और तदर्थ (अस्थायी) कर्मचारियों की सेवाओं को स्थाई (रेगुलर) किया जाए। - अश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) स्कीम की बहाली:
कर्मचारियों की सेवा वृद्धि, समयबद्ध पदोन्नति और करियर में प्रगति सुनिश्चित करने वाली ‘एसीपी (ACP) स्कीम’ को बहाल कर पुनः लागू किया जाए। - वेतन विसंगतियों (Pay Anomalies) का तत्काल निवारण:
विभिन्न विभागों में वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सामने आई वेतन और भत्तों की असमानताओं तथा तकनीकी विसंगतियों को दूर किया जाए। - 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मियों को पूर्ण वेतनमान लाभ:
17 जुलाई 2020 के बाद नियुक्त हुए नए कर्मचारियों को केंद्रीय पैटर्न की बजाय पंजाब के पुराने व संशोधित वेतनमान का शत-प्रतिशत लाभ दिया जाए। - मानदेय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन गारंटी:
ग्रेड-सी लेवल, आंगनबाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स व अन्य मानदेय (Honorarium) तथा अस्थायी कर्मियों के लिए सम्मानजनक ‘न्यूनतम वेतन’ की व्यवस्था लागू हो। - पेंशनभोगियों के लंबित वित्तीय लाभ व अदालती मामलों का निपटारा:
सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के सभी रोके गए वित्तीय देयकों का तुरंत निपटारा किया जाए और उनसे संबंधित अदालती मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।
जमीनी असर: क्या-क्या सेवाएं पूरी तरह प्रभावित और बंद रहेंगी?
इस महाहड़ताल के कारण आम जनता से सीधे जुड़े विभाग प्रभावित हुए हैं:
- स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं:
सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पतालों, आयुष्मान आरोग्य केंद्रों और ‘आम आदमी क्लीनिक’ में ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह बंद हैं। मोहाली, अमृतसर, पटियाला समेत विभिन्न सिविल अस्पतालों में पर्ची काउंटर बंद रहे और मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। सरकारी डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ इस हड़ताल में शामिल हैं। (आपातकालीन/इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गई हैं)। - प्रशासनिक व राजस्व कार्यालय:
चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय, जिला डीसी कार्यालय (DC Office), एसडीएम (SDM) दफ्तर, तहसील, सब-तहसील, पटवारखाने और सेवा केंद्रों (Sewa Kendras) पर ताले लटके हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, रजिस्ट्री, एनओसी और अन्य नागरिक सेवाओं का काम पूरी तरह रुक गया है। - अधिकारियों की आवाजाही प्रभावित:
सरकारी अफसरों की गाड़ियां चलाने वाले विशेष चालक (ड्राइवर्स) भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इस वजह से कई जिलों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच सके। लुधियाना के डीसी भी सुबह निर्धारित समय पर अपने कार्यालय नहीं पहुंच पाए। - बिजली बोर्ड व खजाना विभाग:
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL/पावरकॉम) के सभी क्षेत्रीय दफ्तर और बिल जमा करने वाले कैश काउंटर बंद हैं। इसके साथ ही खजाना कार्यालयों (ट्रेजरी ऑफिस) में सरकारी बिलों की पासिंग और वित्तीय लेनदेन पूरी तरह बाधित है। - स्थानीय निकाय व अन्य विभाग:
पीडब्ल्यूडी (PWD), नहरी विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम और वाटर सप्लाई व मेंटेनेंस विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से विकास कार्य और सीवरेज-पानी की शिकायतों के समाधान का काम रुका रहा। पठानकोट समेत कई शहरों में नगर निगम कार्यालयों के मुख्य द्वारों पर ताला लटका मिला।
राहत की खबर: क्या-क्या सेवाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी?
महाहड़ताल के बीच आम जनता की बुनियादी जरूरतों और निजी क्षेत्र को हड़ताल के दायरे से बाहर रखा गया है:
- निजी संस्थान एवं शिक्षा:
सभी प्राइवेट स्कूल, कॉलेज, निजी विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान, प्राइवेट अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और निजी कॉरपोरेट कार्यालय सामान्य रूप से खुले हैं। - बाजार एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान:
राज्य के सभी छोटे-बड़े बाजार, थोक मंडियां, किराना दुकानें, शॉपिंग मॉल, पेट्रोल पंप और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह खुले हैं और व्यापार सामान्य रूप से चल रहा है। - सरकारी एवं निजी परिवहन:
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी (PRTC) की बसें सामान्य रूप से सड़कों पर दौड़ रही हैं। पहले यूनियन ने बसों के चक्के जाम करने की चेतावनी दी थी, लेकिन त्योहारों (रक्षाबंधन आदि) के मद्देनजर यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए नियमित ड्राइवरों व कंडक्टरों को हड़ताल से अलग रखा गया है। इसके अलावा निजी बसें, ऑटो, टैक्सी और प्राइवेट कैब सेवाएं भी निर्बाध जारी हैं। - आवश्यक वस्तुएं ও रेलवे:
दूध, ब्रेड, फल व सब्जियों की सप्लाई चेन, मेडिकल स्टोर्स और रेलवे नेटवर्क पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है; ट्रेनें अपने तय समय सारिणी से चल रही हैं।
प्रदर्शन के दृश्य: 86 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका से लेकर महिला कर्मियों तक का आक्रोश
हड़ताल के दौरान राज्य भर से व्यापक विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई हैं:
- जालंधर में बड़ी संख्या में महिला आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार विरोधी तख्तियां लेकर जोरदार नारेबाजी की।
- जालंधर के शाहकोट से 86 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका रणधीर कौर धरने में शामिल होने पहुंचीं, जो पेंशनरों के अधिकारों की लड़ाई का मुख्य केंद्र बनीं।
- विभिन्न जिला मुख्यालयों पर मुलाजिमों ने रैलियां निकालीं और मांग पत्र सौंपे।
सरकार का रुख और वार्ता की स्थिति
महाहड़ताल को देखते हुए सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है:
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि “कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और हम उनकी हर जायज चिंता सुनने के लिए तैयार हैं। लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती। सरकार हर मुद्दे का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ठोस बातचीत तभी संभव है जब हड़ताल वापस ली जाए।”
- वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के जालंधर प्रवास के चलते कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक जालंधर में दोपहर 1 बजे निर्धारित की गई है। सरकार का प्रयास है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत कर गतिरोध को समाप्त किया जाए, ताकि टैक्सपेयर्स और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।