मेंटेनेंस के दावों के बीच चरमराया पावरकॉम का ढांचा; शहर से देहात तक अघोषित कटों ने छीनी लोगों की नींद और चैन
दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब के प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी केंद्र जालंधर में इन दिनों बिजली की किल्लत ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले 48 घंटों के दौरान पावरकॉम (PSPCL) द्वारा लगाए गए अघोषित कटों ने यह साफ कर दिया है कि विभाग का बुनियादी ढांचा बढ़ते लोड को सहने में पूरी तरह अक्षम है। शहर की स्थिति यह है कि गर्मी से बेहाल लोग अपने बच्चों को लेकर पूरी रात कारों में बिता रहे हैं, क्योंकि घरों के इनवर्टर घंटों लंबे कटों के आगे सरेंडर कर चुके हैं।
अघोषित कटौती का गणित: कब और कहां हुआ ब्लैकआउट
शनिवार को बिजली कटौती का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल दी। विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के शहर और देहात को अंधेरे में झोंक दिया:
शहरी क्षेत्र: दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक की चिलचिलाती धूप में सप्लाई बंद रही। इसके बाद रात 8:00 बजे से 11:30 बजे तक फिर से ब्लैकआउट रहा।
ग्रामीण क्षेत्र: गांवों में दोपहर 2:25 से शाम 5:00 बजे तक बिजली गुल रही। वहीं, देहात के जनरल फीडरों पर रात 8:30 से 10:00 बजे तक कटौती की गई।
तकनीकी विफलता या कुप्रबंधन?
पावरकॉम के अधिकारी अक्सर बढ़ते तापमान और ओवरलोडिंग का हवाला देते हैं, लेकिन धरातल पर समस्या जर्जर तारों और पुराने ट्रांसफार्मरों की है। शहर में कई जगहों पर जंपर जलने और ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं आम हो गई हैं। विभागीय कर्मचारी दिन के समय ‘रिपेयर’ के नाम पर घंटों सप्लाई बंद रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद रात होते ही फॉल्ट पड़ना शुरू हो जाते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सर्दियों के दौरान किया गया मेंटेनेंस केवल कागजों तक ही सीमित था।
दोहरी मार: पानी का संकट और आर्थिक बोझ
बिजली की किल्लत ने अब जल संकट का रूप ले लिया है। बिजली न रहने से नगर निगम के ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे, जिससे घरों में पानी की सप्लाई बाधित हो गई है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति किसी दोहरी मार से कम नहीं है।
वहीं, इस संकट का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है:
डीजल की बढ़ती खपत: शहर के होटलों, रेस्टोरेंट्स और छोटे उद्योगों में जनरेटरों का इस्तेमाल 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गया है।
लागत में वृद्धि: होटल मालिकों के मुताबिक, बिजली न आने के कारण डीजल पर होने वाला खर्च उनके कुल मुनाफे को कम कर रहा है।
जन आक्रोश: सुविधाओं के अभाव में पूरा टैक्स क्यों?
जालंधर के निवासियों का तर्क है कि वे नियमित रूप से बिजली बिल और टैक्स का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत पर इस अव्यवस्था का बुरा असर पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग पावरकॉम के विरुद्ध अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि ‘पावर सरप्लस’ राज्य में अघोषित कटों का यह दौर आखिर कब थमेगा?